Thursday, August 7, 2008

बाल कथा - आज से तौबा!!


टिनटिन को चॉकलेट खाने की लत थी। वह जब भी मम्मी पापा के साथ बाज़ार जाती, एक ही ज़िद पर अड़ जाती कि मुझे चॉकलेट खाना है। न दिलाये जाने पर वह रो रो कर आसमान सर पर उठा लेती। पापा की लाड़ली होने के कारण हमेशा उसकी ज़िद मान ली जाती और चॉकलेट मिल ही जाती थी। मम्मी को टिनटिन का ज़िद करना बेहद नापसंद था। ज़िद करना अच्छी बात नहीं होती, वे हमेशा ही टिनटिन से कहतीं, लेकिन पापा के लाड़ प्यार की आड़ में वह अपनी बात मनवा ही लिया करती। एक रात वह उठ बैठी, उसके दाँत में जोरों का दर्द था। उसने देखा कि मम्मी-पापा गहरी नींद में हैं। वह जोर जोर से रोने लगी। रोने की आवाज़ से मम्मी चौंक कर उठ गयीं। टिनटिन नें गाल जोर से पकड रखा था, वे यह देखते ही समझ गयीं कि माजरा क्या है। मम्मी नें उठ कर कोई दवा टिनटिन के दाँतों में लगायी, इससे उसे आराम आ गया। सुबह जब पापा उसे डॉक्टर के पास ले गये तो उसने यही सोचा था कि ज्यादा से ज्यादा कोई गोली या कोई कड़वी सिरप मिल जायेगी लेकिन जब डाक्टर साहब नें कहा कि दाँत निकालने पडेंगे, तब तो टिनटिन को 'काटो तो खून नहीं'। वह एकदम से घबरा गयी। पापा नें भी उलाहना दिया कि देखा परिणाम!! तुम्हें चॉकलेट खाने के लिये मना किया जाता था तो सुनती नहीं थी अब दाँत निकलवाना पडेगा। डाक्टर साहब नें जब मुँह में सूई लगायी तो उसकी तो 'जान हथेली पर आ गयी'। उसके रोने का जब पापा और डाक्टर किसी पर भी असर नहीं हुआ तो वह चुपचाप सीट को कस कर पकड कर बैठ गयी। डाक्टर अंकल नें दाँत निकाल दिये, उसे बहुत दर्द तो नहीं हुआ चूंकि दाँत निकलने से पहले टिनटिन का मुँह सुन्न कर दिया गया था, फिर भी वह बहुत घबरा गयी थी....और कई दिनों तक उसने चॉकलेट भी नहीं खाया था।

आज जब टिनटिन स्कूल से वापस लौटी और मम्मी नें जैसे ही उसे होमवर्क कराने के लिये बैग खोला, भीतर से चॉकलेट के कई रैपर निकले। टिनटिन नें मम्मी का गुस्सा शांत करने के लिये बहाना बना दिया कि आज चिंटू का जन्मदिन था इसलिये स्कूल में मिले थे। चाकलेट का लालच उससे रोका नहीं जा रहा था और ये सारे चॉकलेट उसनें अपनी प्यारी कॉमिक्स, चिंटू को दे कर हासिल किये थे। टिनटिन के पास इतने कॉमिक्स थे कि यह बात मम्मी को पता चलने का सवाल ही नहीं उठता था।


टिनटिन को जब से चॉकलेट खाने पर पाबंदी हुई थी, उसका लालच और इच्छा और बढ़ गयी थी। अपने दोस्तों को कोई न कोई लालच दे कर वह चाकलेट हासिल कर ही लेती। इसी लालच के कारण उसे अपनी कितनी ही पेंसिल, रबर कामिक्स, कॉपी आदि से हाँथ धोना पड गया था। एक दिन यह चोरी भी पकडी गयी। मम्मी नें बालकनी से टिनटिन को चॉकलेट के बदले अपनी वह रबर जिस पर मिक्की-माउस बना हुआ था ‘पलक’ को देते हुए देख लिया। फिर क्या था, शाम को टिनटिन की खूब पिटाई हुई और पापा के बचाव करने पर ही मम्मी से वह बच सकी। मम्मी नें बाद में शांति से बैठ कर समझाया कि बेटा कभी-कभार चॉललेट खाने में कोई बुरायी नहीं किंतु इसे आदत और लालच बना कर तुम किसी मुसीबत में पड जाओगी। टिनटिन नें आँखों से बहुत सारा आँसू बहाते हुए मम्मी की सारी बातें सुनी लेकिन गुस्से के कारण कुछ भी समझने के लिये अपना दिमाग खर्च नहीं किया।

टिनटिन की स्कूल वैन उसे घर के पास छोड गयी थी। मम्मी बालकनी पर नहीं थी, किसी काम में व्यस्त हो गयी होंगी, टिनटिन नें सोचा और घर की ओर बढ चली। तभी एक काले से अंकल उसकी ओर बढे और हाँथ हिला कर टिनटिन को अपनी ओर बुलाया। टिनटिन नें इनकार में सिर हिला दिया कि मम्मी कहती हैं कभी भी अनजान लोगों से बात नहीं करनी चाहिये और उनके बुलाने पर नहीं जाना चाहिये। लेकिन तभी वह ठिठक गयी। काले अंकल नें बडी सी चॉकलेट उसकी ओर बढायी।....। टिनटिन के मुँह में पानी आ गया। उसका लालच उसके कदम चॉकलेट की ओर बढाने लगा। टिनटिन नें चॉकलेट ले लिया था। जैसे ही उसने चॉकलेट चखा उसे चक्कर सा आने लगा। वह गिर कर बेहोश हो गयी।...


जब टिनटिन को होश आया तो वह अस्पताल में थी। दरअसल मम्मी उसे लेने ही रही थी और उन्होनें सारा माजरा देख लिया था। उनके शोर मचाने पर भीड इकट्ठी हो गयी और लोगों ने उस आदमी को पकड कर पुलिस के हवाले कर दिया जिसने टिनटिन को चॉकलेट खिला कर बेहोश कर दिया था और उसे ले कर भाग जाने की फिराक में था।



टिनटिन बहुत शर्मिन्दा थी। उसे यह तो समझ में आ गया था कि लालच का कितना बुरा परिणाम हो सकता है। पापा नें टिनटिन को फिर गोद में बैठा कर समझाया कि बेटा कभी भी अनजान लोगों की दी हुई कोई चीज नहीं खानी चाहिये। कई बुरे लोग बच्चों को इस तरह पकड कर ले जाते हैं फिर, या तो उनके मम्मी पापा को उन्हे छुडाने के लिये बहुत से पैसे देने पडते हैं या फिर ये लोग बच्चों को एसे लोगों के हाँथों बेच देते हैं जो इन मासूम बच्चों से भीख मँगवाते हैं या मजदूरी करवाते हैं। टिनटिन डर कर अपने पापा से चिपक गयी। उसने प्रण ले लिया था कि आज के बाद लालच से तौबा।

*** राजीव रंजन प्रसाद
1.11.2007

7 comments:

seema gupta said...

Hey, Kuhu, thanks for sharing your childhood with us, papa kee baat hmesha yaad rekhna, because papa is always right,but choclate khana mt chodna ha ha ha ha because u know I am so found of choclate that aaj bhee i take lot of chocllate" keep sharing
With Love

vijay said...
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vijay said...
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vipinkizindagi said...

achchi post....

main bhi apni beti ko samjhata hun ki chocleta nahi khani chahiye....

Rajesh Roshan said...

बहुत बढ़िया... राजीव जी वो फ़िल्म देखने की आदत है सो कल मैं फ़िल्म देखने गया उगली और पगली उसमें अभिनेत्री मल्लिका का नाम होता है है कुहू..... मैंने सोचा यह नाम कही पढ़ा है... अब याद आया :)

शोभा said...

बहुत ही प्यारी सी कहानी लिखी है राजीव जी आपने। सन्देश भि बढ़िया दिया है। बालकथा का इन्तज़ार रहेगा। सस्नेह

Udan Tashtari said...

पुनः एक उम्दा कथा और सुन्दर सबक. बधाई.